Saturday, May 30, 2020

MagharLeela__of_Godkabir

⛳⛳ ```5 June कबीर परमेश्वर प्रकट दिवस ```⛳⛳

👏बन्दीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज जी की जय👏

😍आज का Topic है:-कबीर परमात्मा का मगहर से सशरीर सतलोक गमन और मगहर लीलाएं

#MagharLeela_Of_GodKabir

👉मगहर में कबीर साहेब ने की अद्भुत लीला!
मगहर में कबीर साहेब के सशरीर सतलोक जाने के बाद उनके हिन्दू और मुस्लिम शिष्यों के बीच विवाद हो गया। मगहर के राजा बिजली खाँ पठान और बनारस के राजा बीर सिंह बघेल के बीच कबीर साहेब के अंतिम संस्कार को लेकर बहुत मतभेद हुआ। लेकिन कबीर साहेब के जाने के बाद चादर के नीचे उनके शरीर के बदले केवल फूल मिले। उसके बाद दोनों धर्म के लोगों ने आधे आधे फूल बाँट लिए।
👏मगहर लीला मगहर रियासत के अकाल प्रभावित स्थान में गोरखनाथ जैसे सिद्ध पुरुष भी बारिश करवाने में नाकाम रहे थे। लेकिन परमात्मा कबीर जी ने वहां बारिश करवाकर दिखा दी थी और साबित कर दिया कि वही जगत पालनहार हैं।
कबीर परमात्मा मगहर से सशरीर सतलोक गए थे!

☆जिंदा जोगी जगत् गुरु, मालिक मुरशद पीर। 
दहूँ दीन झगड़ा मंड्या, पाया नहीं शरीर।।☆
परमात्मा कबीर जी के शरीर को प्राप्त करने के लिए दोनों ही दीन, हिंदू और मुसलमान आपस में झगड़े की तैयारी करके मगहर आए थे लेकिन जब शरीर के स्थान पर सुगंधित फूल मिले तो दोनों आपस में लिपट लिपट कर रोने लगे।

🥰परमात्मा कबीर जी के मगहर से सशरीर जाने के प्रमाण को मलूक दास जी भी प्रमाणित करते हुए कहते हैं:-
काशी तज गुरु मगहर आए, दोनों दीन के पीर,
कोई गाड़े कोई अग्न जरावे, ढूंढा ना पाया शरीर ।
चार दाग से सतगुरु न्यारा, अजरो अमर शरीर।
दास मलूक सलूक कहत हैं, खोजो खसम कबीर।।

👉परमात्मा का मगहर से सशरीर सतलोक
पंडितों ने गलत मान्यता फैलाई थी की कि काशी में मृत्यु होने से मुक्ति मिल जाती है और मगहर में मृत्यु होने से गधा बनते हैं। लेकिन कबीर साहेब का मानना था कि अगर काशी में ही मुक्ति होती है तो जीवन भर राम-नाम जपने और ध्यान-साधना करने की क्या आवश्यकता। इसलिए कबीर साहेब काशी से मगहर जा पहुँचे।
कबीर साहेब ने अपनी वाणी में भी कहा है की,
"लोका मति के भोरा रे, जो काशी तन तजै कबीरा, तौ रामहि कौन निहोरा रे"
👉मगहर से सशरीर सतलोक गमन 
    🥰कबीर परमेश्वर ने हिन्दू धर्मगुरुओं के भ्रम को तोड़ा। जो ये कहा करते थे कि जो मगहर में मरता है वह गधा बनता है और काशी में मरने वाला स्वर्ग जाता है। इस भ्रम निवारण के लिए कबीर साहिब जी ने मगहर से सशरीर सतलोक गमन किया और उनके शरीर के स्थान पर चादर पर सुगंधित फूल पाए गए।🥰
तहां वहां चादरि फूल बिछाये, सिज्या छांडी पदहि समाये।
दो चादर दहूं दीन उठावैं, ताके मध्य कबीर न पावैं।।

👍कबीर परमेश्वर मगहर से सशरीर सतलोक गए !👍
उनके शरीर के स्थान पर सुगंधित फूल पाए गए जो कबीर परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार दोनों धर्मों ने आपस में लेकर मगहर में 100 फुट के अंतर से एक-एक यादगार बनाई जो आज भी विद्यमान है।
यह दोनों धर्मों हिंदुओं और मुसलमानों में आपसी भाईचारे व सद्भावना की एक मिसाल का प्रमाण है।

🙂काशी के ब्राह्मणों ने गलत अफवाह फैला रखी थी कि जो काशी में मरता है स्वर्ग जाता है और जो मगहर में शरीर छोड़ता है वह गधे का जन्म पाता है। कबीर परमेश्वर जी मनमाने लोकवेद का खंडन करने के लिए मगहर में हजारों लोगों के सामने सशरीर गये। शरीर की जगह फूल मिले और भविष्यवाणी कर बताया कि मैं स्वर्ग और महास्वर्ग से ऊपर अविनाशी धाम सतलोक जा रहा हूँ।

राम और अल्लाह एक ही हैं!
600 साल पहले कबीर साहेब ने मगहर में शरीर छोड़ने से पहले सभी लोगो को अपना ज्ञान समझाते हुए कहा कि राम और अल्लाह एक ही हैं सभी धर्मों के लोग एक परमपिता की संतान है।
   👏आदरणीय गरीबदास जी महाराज ने परमात्मा कबीर साहेब की मगहर लीला(सशरीर सतलोक गमन) का वर्णन करते हुए कहा है कि,
"देख्या मगहर जहूरा सतगुरु, कांशी मैं कीर्ति कर चाले, झिलमिल देही नूरा हो।"
👆कबीर परमात्मा की मगहर लीला👆
आज भी मगहर में कबीर साहेब जी के दिखाए गए मार्ग पर चलते हुए हिन्दू और मुसलमान आपस में बहुत प्यार से रहते हैं।
👉मगहर में सूखी नदी में पानी बहाना
मगहर के समीप एक आमी नदी बहती थी। वह भगवान शंकर जी के श्राप से सूख गई थी। पूर्ण ब्रह्म कबीर साहेब ने उसी समय अपनी शक्ति से उसमें पानी भर चलाया। आज भी आमी नदी प्रमाण के तौर पर बह रही है। फिर परमेश्वर कबीर साहेब हजारों लोगों के सामने से सशरीर सतलोक गये।👇🏻👇🏻

"मगहर का मौहल्ला कबीर करम"
😍कबीर परमेश्वर जी ने मगहर रियासत में 14वीं शताब्दी में पड़े भीषण अकाल को अपनी समर्थ शक्ति से टालकर वर्षा करके सबको जीवनदान दिया। हजारों हिंदू-मुसलमानों ने उपदेश लिया। एक 70 वर्षीय निःसंतान मुसलमान दंपती को पुत्र होने का आशीर्वाद दिया। वर्तमान में उस व्यक्ति का एक पूरा मौहल्ला बना हुआ है, नाम है "मौहल्ला कबीर करम"
मगहर में परमात्मा का चमत्कार!
कबीर परमेश्वर जी के अद्भुत चमत्कार जैसे अकाल से बचाना, सूखी आमी नदी बहाना, सशरीर सतलोक जाना आदि देखकर तथा उनके‌ द्वारा दिए तत्वज्ञान का‌ अनुसरण करके मगहर के सर्व हिंदू-मुसलमान आज भी विशेष प्रेम से रहते हैं। आज तक उनकी धर्म के नाम पर कोई लड़ाई नहीं!!
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Friday, May 29, 2020

GodKabir_Comes_in_4_yoges

⛳⛳ ```5 June कबीर परमेश्वर प्रकट दिवस

*#GodKabir_Comes_In_4_Yugas*
#सत_भक्ति_संदेश
👇👇👇👇

🌺 *सतगुरु रामपाल जी महाराज जी* प्रमाणित करके बताते हैं :-

👉कबीर परमात्मा चारों युगों में आते हैं
यजुर्वेद के अध्याय नं. 29 के श्लोक नं. 25 (संत रामपाल जी महाराज द्वारा भाषा-भाष्य):-
जिस समय पूर्ण परमात्मा प्रकट होता है उस समय सर्व ऋषि व सन्त जन शास्त्र विधि त्याग कर मनमाना आचरण अर्थात् पूजा कर रहे होते हैं। तब अपने तत्वज्ञान का संदेशवाहक बन कर स्वयं ही कबीर प्रभु ही आता है।


👉कबीर परमेश्वर चारों युगों में अपने सत्य ज्ञान का प्रचार करने आते हैं।
सतगुरु पुरुष कबीर हैं, चारों युग प्रवान।
झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।।

👉पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर परमेश्वर) वेदों के ज्ञान से भी पूर्व सतलोक में विद्यमान थे तथा अपना वास्तविक ज्ञान (तत्वज्ञान) देने के लिए चारों युगों में भी स्वयं प्रकट हुए हैं। 


👉सतयुग में सतसुकृत नाम से, त्रेतायुग में मुनिन्द्र नाम से, द्वापर युग में करूणामय नाम से तथा कलयुग में वास्तविक कविर्देव (कबीर प्रभु) नाम से प्रकट हुए हैं।

👉कबीर परमात्मा अन्य रूप धारण करके कभी भी प्रकट होकर अपनी लीला करके अन्तर्ध्यान हो जाते हैं। उस समय लीला करने आए परमेश्वर को प्रभु चाहने वाले श्रद्धालु नहीं पहचान पाते, क्योंकि सर्व महर्षियों व संत कहलाने वालों ने प्रभु को निराकार बताया है। वास्तव में परमात्मा आकार में है। मनुष्य सदृश शरीर युक्त है। 
👉परमेश्वर का शरीर नाड़ियों के योग से बना पांच तत्व का नहीं है। एक नूर तत्व से बना है। पूर्ण परमात्मा जब चाहे यहाँ प्रकट हो जाते हैं वे कभी मां से जन्म नहीं लेते क्योंकि वे सर्व के उत्पत्ति करता हैं।

👉सतयुग में कविर्देव (कबीर साहेब) का सत्सुकृत नाम से प्राकाट्य“
पूर्ण प्रभु कबीर जी (कविर्देव) सतयुग में सतसुकृत नाम से स्वयं प्रकट हुए थे। उस समय गरुड़ जी, श्री ब्रह्मा जी श्री विष्णु जी तथा श्री शिव जी आदि को सतज्ञान समझाया था।
👉पूर्ण प्रभु कबीर जी (कविर्देव) सतयुग में सतसुकृत नाम से स्वयं प्रकट हुए थे।
👉ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मंत्र 9
अभी इमं अध्न्या उत श्रीणन्ति धेनवः शिशुम्। सोममिन्द्राय पातवे।।9।।
पूर्ण परमात्मा अमर पुरुष जब लीला करता हुआ बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होता है उस समय कंवारी गाय अपने आप दूध देती है जिससे उस पूर्ण प्रभु की परवरिश होती है।

👉ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17
शिशुम् जज्ञानम् हर्य तम् मृजन्ति शुम्भन्ति वह्निमरूतः गणेन।
कविर्गीर्भि काव्येना कविर् सन्त् सोमः पवित्रम् अत्येति रेभन्।।
विलक्षण मनुष्य के बच्चे के रूप में प्रकट होकर पूर्ण परमात्मा कविर्देव अपने वास्तविक ज्ञानको अपनी कविर्गिभिः अर्थात् कबीर बाणी द्वारा पुण्यात्मा अनुयाइयों को कवि रूप में कविताओं, लोकोक्तियों के द्वारा वर्णन करता है। वह स्वयं सतपुरुष कबीर ही होता है!
👉कलयुग में कबीर परमेश्वर अपने वास्तविक नाम कबीर रूप में काशी नगरी में लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर अवतरित हुए।
कलयुग में निसंतान दंपति नीरू और नीमा ने उनका पालन पोषण किया।

👉परमेश्वर कबीर जी त्रेतायुग में ऋषि मुनीन्द्र जी के रूप में लीला करने आए तब हनुमान जी से मिले। तथा सतलोक के बारे में बताया हनुमानजी को विश्वास हुआ कि ये परमेश्वर हैं। सत्यलोक सुख का स्थान है। परमेश्वर मुनीन्द्र जी से दीक्षा ली। अपना जीवन धन्य किया। मुक्ति के अधिकारी हुए।
👉द्वापर युग में कबीर परमेश्वर की दया से पांडवों का अश्वमेध यज्ञ संपन्न हुआ।
पांडवों की अश्वमेघ यज्ञ में अनेक ऋषि, महर्षि, मंडलेश्वर  उपस्थित थे यहां तक कि भगवान कृष्ण भी उपस्थित थे फिर भी उनका शंख नहीं बजा।
कबीर परमेश्वर ने सुदर्शन सुपच वाल्मीकि के रूप में शंख बजाया और पांडवों का यज्ञ संपन्न किया।
गरीबदास जी महाराज की वाणी में इसका प्रमाण है
"गरीब सुपच रुप धरि आईया, 
सतगुरु पुरुष कबीर, 
तीन लोक की मेदनी, 
सुर नर मुनि जन भीर"
👆 इस तरह से कबीर परमात्मा चारों युगों में आते हैं।
                 🙏🏻सत साहेब 🙏🏻
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Tuesday, May 19, 2020

करोना का बढ़ता कहर बेरोजगारी के साथ😥

बढती बेरोजगारी 
           
         👉जब देश में कार्य करनेवाली जनशक्ति अधिक होती है किंतु काम करने के लिए राजी होते हुए भी बहुतों को प्रचलित मजदूरी पर कार्य नहीं मिलता, तो उस विशेष अवस्था को 'बेरोजगारी' (Unemployment) की संज्ञा दी जाती है। ऐसे व्यक्तियों का जो मानसिक एवं शारीरिक दृष्टि से कार्य करने के योग्य और इच्छुक हैं परंतु जिन्हें प्रचलित मजदूरी पर कार्य नहीं मिलता, उन्हें 'बेकार' कहा जाता है।

बेेरोजगारी की व्याख्या 
         👏मजदूरी की दर से तात्पर्य प्रचलित मजदूरी की दर से है और मजदूरी प्राप्त करने की इच्छा का अर्थ प्रचलित मजदूरी की दरों पर कार्य करने की इच्छा है। यदि कोई व्यक्ति उसी समय काम करना चाहे जब प्रचलित मजदूरी की दर पंद्रह रुपए प्रतिदिन हो और उस समय काम करने से इन्कार कर दे, जब प्रचलित मजदूरी बारह रुपए प्रतिदिन हो, ऐसे व्यक्ति को बेकार अथवा बेरोजगारी की अवस्था से त्रस्त नहीं कहा जा सकता। इसके अतिरिक्त ऐसे भी व्यक्ति को बेकार अथवा बेरोजगारी से त्रस्त नहीं कह सकते जो कार्य तो करना चाहता है परंतु बीमारी के कारण कार्य नहीं कर पाता। बालक, रोगी, वृद्ध तथा असहाय लोगों को "रोजगार अयोग्य" (unemployables) तथा साधु, पीर, भिखमंगे तथा कार्य न करनेवाले जमींदार, सामंत आदि व्यक्तियों को पराश्रयी कहा जा सकता है।

बेरोजगारी की हानिया
🤔बेरोजगार होने पर हम सरकार पर दायित्व होते हैं सरकार बेरोजगार युवाओं के ऊपर बहुत धन व्यय करती है जैसे गैहू को 18 रुपया में खरीद कर 1.5 रुपये में देती है । जिससे सरकार का बहुत नुकसान होता है।

बेरोजगारी के भेद 

   👉 बेरोजगारी का अस्तित्व श्रम की माँग और उसकी आपूर्ति के बीच स्थिर अनुपात पर निर्भर करता है। बेरोजगारी के दो भेद हैं - असंतुलनात्मक (फ्रिक्शनल) तथा ऐच्छिक (वालंटरी)। असंतुलनात्मक बेरोजगारी श्रम की माँग में परिवर्तन के कारण होती है। ऐच्छिक बेरोजगारी का प्रभाव उस समय होता है जब मजदूर अपनी वास्तविक मजदूरी में कटौती को स्वीकार नहीं करता। समग्रत: बेरोजगारी श्रम की माँग और पूर्ति के बीच असंतुलित स्थिति का प्रतिफल है।
प्रोफेसर जे.एम. कीन्स "अनैच्छिक बेरोजगारी" को भी बेरोजगारी का भेद मानते हैं। "अनैच्छिक बेरोजगारी" की परिभाषा करते हुए उन्होंने लिखा है -
'👉जब कोई व्यक्ति प्रचलित वास्तविक मजदूरी से कम वास्तविक मजदूरी पर कार्य करने के लिए तैयार हो जाता है, चाहे वह कम नकद मजदूरी स्वीकार करने के लिए तैयार न हो, तब इस अवस्था को अनैच्छिक बेरोजगारी कहते हैं।'
यदि कोई व्यक्ति किसी उत्पादक व्यवसाय में कार्य करता है तो इसका यह अर्थ नहीं है कि वह बेकार नहीं है। ऐसे व्यक्तियों को पूर्णरूपेण रोजगार में लगा हुआ नहीं माना जाता जो आंशिक रूप से ही कार्य में लगे हैं अथवा उच्च कार्य की क्षमता रखते हुए भी निम्न प्रकार के लाभकारी व्यवसायों में कार्य करते हैं।

समस्या एवं निदान 
सन् 1919 ई. में अंतरराष्ट्रीय श्रमसम्मेलन के वाशिंगटन अधिवेशन ने बेरोजगारी अभिसमय (Unemployment convention) संबंधी एक प्रस्ताव स्वीकार किया था जिसमें कहा गया था कि केंद्रीय सत्ता के नियंत्रण में प्रत्येक देश में सरकारी कामदिलाऊ अभिकरण स्थापित किए जाए। सन् 1931 ई. में भारत राजकीय श्रम के आयोग (Royal Commission on Labour) ने बेरोजगारी की समस्या पर विचार किया और निष्कर्ष रूप में कहा कि बेरोजगारी की समस्या विकट रूप धारण कर चुकी है। यद्यपि भारत ने अंतर्राष्ट्रीय श्रमसंघ का "बेरोजगारी संबंधी" समझौता सन् 1921 ई. में स्वीकार कर लिया था परंतु इसके कार्यान्वयन में उसे दो दशक से भी अधिक का समय लग गया।

सन् 1935 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ऐक्ट में बेरोजगारी (बेरोजगारी) प्रांतीय विषय के रूप में ग्रहण की गई। परंतु द्वितीय महायुद्ध समाप्त होने के बाद युद्धरत तथा फैक्टरियों में काम करनेवाले कामगारों को फिर से काम पर लगाने की समस्या उठ खड़ी हुई। 
1942-1944 में देश के विभिन्न भागों में कामदिलाऊ कार्यालय खोले गए परंतु कामदिलाऊ कार्यालयों की व्यवस्था के बारे में केंद्रीकरण तथा समन्वय का अनुभव किया गया। अत: एक पुनर्वास तथा नियोजन निदेशालय (Directorate of Resettlement and Employment) की स्थापना की गई है। हम ये रोक सकते हैं।
छिपी बेरोजगारी : छिपी बेरोजगारी से पीडित व्यक्ति वह होता है जो ऐसे दिखाई देता है जेसे कि वह काम में लगा हुआ है, परन्तु वास्तव में ऐसा नही होता।

😥कोरोना वायरस के दौर में बेरोजगारी: नौकरी जाने पर क्या क्या गुजरती है
कोरोना वायरस के प्रसार के साथ ही लगभग हर हफ्ते किसी न किसी क्षेत्र से हजारों कर्मचारियों को बिना वेतन के छुट्टी देने, नौकरियों से निकालने, वेतन में भारी कटौती की खबरें आ रही हैं.
माल्स, रेस्तरां, बार, होटल सब बंद हैं, विमान सेवाओं और अन्य आवाजही के साधनों पर रोक लगी हुई है. फ़ैक्टरियां, कारखाने सभी ठप पड़े हैं.
ऐसे में संस्थान लगातार लोगों की छंटनी कर रहे हैं और हर कोई इसी डर के साये में जी रहा है कि न जाने कब उसकी नौकरी चली जाए.
इसके अलावा स्वरोजगार में लगे लोग, छोटे-मोटे काम धंधे करके परिवार चलाने वाले लोग सभी घर में बैठे हैं और उनकी आमदनी का कोई स्रोत नहीं है.
बॉस्टन कॉलेज में काउंसिलिंग मनोविज्ञान के प्रोफ़ेसर और 'द इंपोर्टेन्स ऑफ वर्क इन अन एज ऑफ अनसर्टेनिटी : द इरोडिंग वर्क एक्सपिरियन्स इन अमेरिका' क़िताब के लेखक डेविड ब्लूस्टेन कहते हैं, "बेरोज़गारी की वैश्विक महामारी आने वाली है. मैं इसे संकट के भीतर का संकट कहता हूँ."
जिन लोगों की नौकरियाँ अचानक चली गयी हैं या लॉकडाउन के कारण रोज़गार अचानक बंद हो गया है, उन्हें आर्थिक परेशानी के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है.!!
सरकारों, स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा आर्थिक मदद दी जा रही है, लेकिन सवाल यह भी है कि नौकरी जाने या रोज़गार का ज़रिया बंद होने पर अपनी भावनाओं को कैसे संभालें? कैसे नकारात्मक भावनाओं को खुद पर हावी न होने दें?
सारा कहती हैं, "निश्चित रूप से कुछ भी नहीं कहा जा सकता. जिन लोगों को नौकरी से हटाया जाता है वो अपने मालिकों से नाराज़ रहते हैं. मेरा मानना है कि यह नाराज़गी इसलिए होती है कि आपको लगता है आपकी जगह कोई और ले सकता है, उन्हें आपसे सस्ते में काम करने वाला कोई मिल गया या आपको लगता है कि आपको कभी टीम का हिस्सा ही नहीं माना गया था जबकि आपको हमेशा यही लगता था कि आप टीम के लिए ज़रूरी हैं... वगैरह-वगैरह."

😔ये मत कहो खुदा से,,,,,,मेरी मुश्किलें बड़ी है।
उन मुश्किलों से कह दो,,,,,, मेरा खुदा बड़ा है।👏

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                                         Thanks 👏👏

Wednesday, May 13, 2020

✊कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ एक अभियान ✊

               कन्या भ्रूण हत्या - एक समाजिक कुरीति 

बेटी .....
              हमारे जीवन में बेटी का बहुत महत्व है! 
इसको समझना बहुत जरूरी है।  
 बेटीयाँ हमारे जीवन में वरदान स्वरुप है! इन्हे बचाना हमारा मूल उद्देश्य है! 
        

बेटी बचाव के महत्वपूर्ण उठाया गए कदम.....

✊कुरुक्षेत्र, 24 जनवरी (हि.स.)✊
   👏कन्या भ्रूण हत्या जैसे जघन्य अपराध को रोकने के लिए पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम (पीसीपीएनडीटी एक्ट) को सख्ती से लागू करने पर राष्ट्रीय बालिका दिवस समारोह में भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा जिला कुरुक्षेत्र को राष्ट्रीय अवॉर्ड से नवाजा गया है। केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने नई दिल्ली में उपायुक्त डाॅ. एसएस फुलिया को यह पुरस्कार प्रदान किया।
इस पुरस्कार को हासिल करने वालों में उपायुक्त के अलावा पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र पाल सिंह, सीएमओ डा. सुखबीर सिंह भी शामिल थे।

❣ गुरुवार को नई दिल्ली स्थित प्रवासी भारतीय केन्द्र में राष्ट्रीय बालिका दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के तहत कुरुक्षेत्र सहित देश के विभिन्न जिलों को बेहतर कार्य करने पर मंत्रालय की तरफ से सम्मानित किया। समारोह में केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी के अलावा केन्द्रीय राज्यमंत्री डा. विरेन्द्र कुमार, हरियाणा की महिला एवं बाल विकास मंत्री कविता जैन, महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव राकेश श्रीवास्तव भी मौजूद थे। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के अंतर्गत कन्या भ्रूण हत्या जैसे जघन्य अपराध करनेवालों को सजा दिलवाने पर कुरुक्षेत्र जिले ने पूरे देश में अलग छाप छोड़ी! 

PM modi ...
 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरियाणा के पानीपत से बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत की। इस कार्यक्रम को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के मार्गदर्शन में जिला कुरुक्षेत्र में पूरी ईमानदारी से चलाया गया। जिले में कन्या भ्रूण जांच व हत्या करने वाले लोगों के खिलाफ मुहिम शुरू की गई जिसके सार्थक परिणाम आए। 
👉उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 से लेकर अबतक पीएनडीटी एक्ट के तहत 18 और एमटीपी एक्ट के तहत भी 18 ही मुकदमे दर्ज करवाए जा चुके हैं। इन मुकदमों के तहत 116 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस जिले में वर्ष 2016 में लिंगानुपात 859 था और अब लिंगानुपात का आंकड़ा 924 पर पहुंच गया है। 

 "We cannot keep catching people doing (illegal) ultrasound," she said, adding that arrest of such people was not a permanent solution.
👉 At a function in Jaipur, Maneka had said, "In my personal view, the woman should be compulsorily told that whether it is a boy or girl child whom she is going to give birth. It should be registered to be able to check whether they have given the births or not."
"I am just putting out this idea. It is being discussed though there is no conclusion yet," she said adding that it is a different way to look at this problem of female foeticide which could be solved with this idea.
☺☺☺☺☺☺☺☺☺☺☺☺☺😆😆
 This Community Celebrates the Birth of Girls, But Only for Flesh Trade

#___ज़िन्दगी बहुत हल्की #महसूस होगी...
अगर #उम्मीद दूसरों से #कम और #खुदा पर #ज्यादा हो तो....
कोई #आपका साथ दे या ना दे #निराश मत होना.…
क्योंकि #परमात्मा से बड़ा #हमसफ़र कोई नहीं होता है....🙇🏻‍♀️🙇🏻‍♀️🙇🏻‍♀️🥰🥰🥰🥰 
 वर्तमान में सिर्फ जगद्गुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ही हैं जो शास्त्र अनुकूल सत् भक्ति विधि से भगत समाज को काल के दुखों से बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

Must visit sadhna Channel 7:30pm 
https://www.jagatgururampalji.org/gita_tera_gyan_amrit_full.pdf
                                     THANKS FOR ALL🙏🏻
✊बेटी बचाओ , बेटी पढाओ ✊

बढती बेरोजगारी मजदूरो पर पङी भारी 😞

 विकासशील देशों में निम्न प्रकार की बेरोजगारी पाई जाती है
1. मौसमी बेरोजगारी (Seasonal Unemployment): इस प्रकार की बेरोजगारी कृषि क्षेत्र में पाई जाती है. कृषि में लगे लोगों को कृषि की जुताई, बोवाई, कटाई आदि कार्यों के समय तो रोजगार मिलता है लेकिन जैसे ही कृषि कार्य ख़त्म हो जाता है तो कृषि में लगे लोग बेरोजगार हो जाते हैं.!


 👉मोदी सरकार की प्रमुख योजनायें
3. संरचनात्मक बेरोजगारी (Structural Unemployment): संरचनात्मक बेरोजगारी तब प्रकट होती है जब बाजार में दीर्घकालिक स्थितियों में बदलाव आता है. उदाहरण के लिए: भारत में स्कूटर का उत्पादन बंद हो गया है और कार का उत्पादन बढ़ रहा है. इस नए विकास के कारण स्कूटर के उत्पादन में लगे मिस्त्री बेरोजगार हो गए और कार बनाने वालों की मांग बढ़ गयी है.  इस प्रकार की बेरोजगारी देश की आर्थिक संरचना में परिवर्तन के कारण पैदा होती है.!

विभिन्न सूचकांकों और अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट में भारत की रैंक (2019-20)


👇🏻क्राउडफंडिंग: मीनिंग, प्रकार और लाभ👇🏻

विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2020: 
👉भारतीय रैंक, पैरामीटर और रैंक गिरने के कारण

भारत में प्रमुख श्रम कानूनों की सूची:-
विभिन्न देशों को उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, व्यापार और व्यवसाय वातावरण आदि के आधार पर हर साल कई अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट और इंडेक्स में रैंक दी जाती है. इस लेख में हमने विश्व बैंक, आईएमएफ और विश्व आर्थिक मंच जैसे कुछ प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों की रिपोर्ट प्रकाशित की है और इनमें भारत की स्थिति भी बतायी है!


लॉकडाउन के बीच मिली राहत! मई के शुरुआती हफ्ते में बेरोजगारी दर 3 फीसदी घटी

सेन्टर फ़ॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (CMIE) के आंकड़ों के मुताबिक, 10 मई को खत्म हफ्ते में बेरोज़गारी दर 3 फीसदी तक गिर गई है. खेती की गितिविधिया बढ़ने से लोगों को रोज़गार मिला है. आइए जानें पूरी रिपोर्ट के बारे में...
 >> राहत भरी खबर ये रही कि 20 अप्रैल के बाद लगभग 58 लाख किसान खेती-किसानी से जुड़े काम में जुट गए. वहीं, ग्रामीण बेरोजगारी दर में 4 फीसदी की गिरावट आई है.
>> रिपोर्ट के मुताबिक, बुआई और खेती से जुड़ी अन्य गतिविधियां शुरू होने से लोगों को रोज़गार मिला है.
>> इसके अलावा होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर भी काफी ज्यादा मार पड़ी है. इसके अतिरिक्त मल्टीप्लेक्स रिटेल एविएशन मैन्युफैक्चरिंग और मीडिया उद्योग पर भी लॉकडाउन का बेहद बुरा असर हुआ है. इसी के चलते बड़े पैमाने पर नौकरियां और रोजगार छीने हैं.
इन राज्यों में तेजी से बढ़ी बेरोज़गारी
>> CMIE की इससे पहले रिपोर्ट में बताया गया था कि तमिलनाडु में बेरोज़गारी दर 49.8 फीसदी रही है. वहीं, झारखंड में ये आंकड़ा 47.1 फीसदी रहा है तो बिहार में ये आंकड़ा 46.6 फीसदी रहा है.
>> वहीं अगर उन राज्यों की बात करें जहां पर बेरोजगारी दर सबसे कम रही है तो इसमें पहले नंबर पर पंजाब आता है.
>>  वही दूसरे नंबर पर छत्तीसगढ़ है तो तीसरे नंबर पर तेलंगाना का नंबर आता है तो उसका पंजाब में बेरोजगारी दर 2.9 फीसदी रही है.
>> वही बात अगर छत्तीसगढ़ की करें तो यह आंकड़ा 3.4 फीसदी का रहा है जबकि तेलंगाना की अगर बात करें तो वहां बेरोजगारी दर 6.2 फीसदी रही है.
ये भी पढ़ें-मोदी सरकार की इस स्कीम से 5 साल में जुड़े 2 करोड़ लोग, मिलती है ₹5 हजार पेंशन

नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Covid 19) के संक्रमण को रोकने के मद्देनज़र जारी लॉकडाउन (Lockedown Part 3) से देश के सभी बिजनेस  पर मार पड़ी है. लेकिन छोटे और मझोले उद्योगों पर इसका असर ज्यादा दिख रहा है. हालांकि, सरकार की ओर से कुछ इंडस्ट्री शुरू करने को मिली छूट के बाद बेरोज़गारी दर में गिरावट आई है.  सेन्टर फ़ॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (CMIE-Centre for Monitoring of Indian Economy) के आंकड़ों के मुताबिक, 10 मई को खत्म हफ्ते में बेरोज़गारी दर 27.11 फीसदी से गिरकर 23.97 फीसदी पर आ गई है.
आपको बता दें कि अप्रैल महीने तक 12.15 करोड़ लोगों का रोज़गार जा चुका है. इनमें से 9.13 करोड़ दिहाड़ी मजदूर और छोटे व्यापारियों के यहां काम करने वाले लोगों का रोज़गार गया है. सीएमआईई के सर्वे में 1,17,000 लोगों शामिल है. इन सभी से बातचीत की गई है.!


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Friday, May 8, 2020

Coronavirus daly apdates for SUTDESINER.BLOGSPOT.COM

CORONA VIRUSE DALY TIME APDATES 

 👉देशभर में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। 

🙄केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में 3320 नए मामले सामने आए हैं और 95 लोगों की मौत हुई है। 

            👏इसके बाद देशभर में कोरोना पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या 59,662 हो गई है, जिनमें 39,834 सक्रिय हैं, 17,847 लोग स्वस्थ हो चुके हैं या उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और 1981 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, आज राजस्थान में 57 नए मामले दर्ज किए गए हैं।


 🌏 यहां पढ़ें देश में कोरोना वायरस से संबंधित सभी अपडेट्स...

लाइव अपडेट

10:29 AM, 09-MAY-2020

✍अमित शाह ने प्रवासी मजदूरों को लेकर ममता बनर्जी को लिखा पत्र....✍

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🙏🏻केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को पत्र लिखकर कहा है कि प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए उन्हें राज्य सरकार का सहयोग प्राप्त नहीं हो पा रहा है। शाह ने कहा कि प्रवासी मजदूरों के साथ पश्चिम बंगाल पहुंचने वाली ट्रेनों को राज्य सरकार अनुमति नहीं दे रही है। पश्चिम बंगाल तक ट्रेनों को नहीं आने देना प्रवासी मजदूरों के साथ अन्याय है।

🙏🏻जागरूक करने के लिए सड़क पर पेंटिंग बनाई🙏🏻

👆जम्मू-कश्मीर के जम्मू की एक छात्रा ने लोगों को कोरोना वायरस को लेकर जागरूक करने के लिए सरवाल इलाके में सड़क पर पेंटिंग बनाई।👆

DALY LIVE APDATES.....FOR SUTDESINER.BLOGSPOT.COM 

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Thursday, May 7, 2020

IMPORTANT FACTS OF CORONA APDATES

 CORONA APDATES REAL TIME 🌏

 👏: कोरोना संकट में जहां एक तरफ मजदूर और रेहड़ी पटरी वाले राशन नहीं मिलने से परेशान हैं वहीं घर में महंगी कार और एसी होने के बावजूद कुछ लोग मुफ्त का राशन पाने के लिए राशन कार्ड बनवा रहे हैं। 

 🏤गोविन्दपुरम, कविनगर, शास्त्रीनगर, विजयनगर आदि जगह पर पार्षद और राशन डीलरों के पास आवेदन किए गए। राशन कार्ड बनने से पहले ही कई मामले पकड़ में आ गए। नगर निगम अब जांच के बाद ही आवेदन पत्र जिला आपूर्ति विभाग को भेज रहा है।

   🌃लॉकडाउन से बाजार, दुकान, फैक्टरी और रेस्टोरेंट आदि सभी बंद हैं। काम धंधा बंद होने से लोगों को आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है। खासकर मजदूर वर्ग परेशान हैं। उनके सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया। परेशानी को देखते हुए मजदूर, रेहड़ी पटरी वाले आदि का राशन कार्ड बनवाने के आदेश जारी हुए। 
   
       🏘शहरी क्षेत्र में राशन कार्ड बनवाने के लिए आवेदन कराने का काम नगर निगम को दिया गया। नगर निगम मजदूरों के आवेदन पत्र लेने के बाद उन्हें जिला आपूर्ति विभाग को भेज रहा और वहीं से राशन कार्ड जारी किए जा रहे हैं। लेकिन मजदूरों के साथ-साथ अमीर लोग भी राशन कार्ड बनवाने के लिए आवेदन कर रहे हैं। 
👆👆इनमें वे लोग हैं जिनके घरों में महंगी गाड़ियां और एसी हैं। उनकी आमदनी अच्छी खासी है। इन लोगों ने पार्षद और राशन डीलर के पास राशन आवेदन किए। जिला आपूर्ति विभाग और नगर निगम की जांच में कई मामले पकड़ में आए हैं। जो आवेदन पकड़ में आए उन्हें रद्द कर दिया गया।

👏: केस एक: 
           👉गोविन्दपुरम में रहने वाले पांच लोगों ने राशन कार्ड बनवाने के लिए पार्षद और राशन डीलर के पास आवेदन किया। गोविन्दपुरम के अलावा डीलर सदरपुर गांव में है। आवेदन करने वाले पात्र नहीं हैं। इन सभी के पास गाड़ियां और घरों में एसी है। इसके बाजवूद लोगों ने राशन कार्ड बनवाने के लिए आवेदन कर डाले। पार्षद पति सोहनवीर सिंह ने बताया कि इस तरह के आवेदन आए थे। निगम कर्मचारी ने जांच के बाद आवेदन रद्द कर दिए।

👏केस दो: 
       👉शास्त्रीनगर के रहने वाले कपिल शर्मा की परचून की दुकान है। उनके घर में एक गाड़ी और एसी है। इसके बावजूद राशन कार्ड के लिए आवेदन कर डाला। जांच के दौरान जिला आपूर्ति विभाग ने आवेदन गलत पाया, इसलिए उनका आवेदन निरस्त कर दिया गया।
केस तीन: कविनगर में रहने वाले कुछ लोगों ने भी राशन कार्ड बनवाने के लिए पार्षद और डीलर के पास आवेदन किया। जांच के दौरान नगर निगम को पता चला कि आवेदनकर्ता अपात्र है, इसलिए उन सभी के आवेदन फॉर्म को निरस्त कर दिया गया। प्रशासन की ओर से जांच कर इनके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।
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